एक उडाण हीम्मत की...

                 ये कहाणी एक लडकी की है । 
                 उसकी जिंदगी में सब ठीक चल रहा था। लेकीन, उसके १३ साल की उम्र में उसके पिता चल बसे। उस दिन के बाद सब कूछ बदल गया।उसके पिता के गुजर जाने के ४० दिन बाद ही उसकी सगाई करवा दी गई, वो भी जबरदस्ती, ऐसे लडके से जो करीब उससे १२ या शायद १३ साल बडा था।पूरे हातों और पैरो में लगी मेहंदी से वो कैसे स्कुल जा पाती।जब तक मेहंदी का रंग नही उतरा वो स्कुल नही गई। लेकीन फिर भी आस-पास के लोग तो बाते बनाने ही लगे, वैसे उनकी बाते कहा गलत थी; इतनी कम उम्र में सगाई और वो भी पिता के गुजरने के तुरंत बाद।जमाने की बाते और उस के साथ जो अचानक से हुवा, उस से वो लडकी अंदरही टुट रही थी,कुछ समझ नही पारी थी।अपने खेलने-कुदने की उम्र में जिंदगी ने उसे बडा झटका दिया था। पर उसके मन का हाल किसिने नही जाना।इतनी छोटी उम्र में वो कुछ समझ नही पारी थी, लेकिन जो हुआ वो गलत हुआ ये समझ रही थी।
                    सगाई के १ साल बाद लडके वाले शादी की बात करने लगे।लेकीन उसके बडी बहन का रिश्ता होना अभी बाकी था इस लिये बात टल गई।लेकीन घर मे उसे कहा सुकून था हर बार शादी के नाम पर ताने सुनना पडते थे,की खाना पकाना सिख ले, घर का काम-काज सिख ले।हर रोज बस शादी की बाते करते थे।ऎसे मे स्कुल ही एक ऐसी जगह थी, जहा वो ये सब बाते भुल पाती।अपनी सहेलीयो के साथ खेल मे पढाई मे उसका मन लगने लगा।उसे पढाई मे अच्छे गुण मिलने लगे। तभी एक दीन लडके ने फोन कर कहा की उसे स्कुल से निकाल लो, पढाने लिखाने की जरुरत नही है।उसका बडा भाई दाखिला निकालने स्कुल भी गया।लेकीन स्कुल के एक सरजी ने घर जाकर उसकी माँ और भाई को समझाया की उस की शिक्षा मत रुकवाना तब सर की बात का घरवालो ने मान रखा और लडके से बात की।८ वी कक्षा पास होने के बाद ९ वी कक्षा मे लडकी और अच्छेसे पढने लगी। लेकीन उसे शादी के नाम और उस लडके से भी बहोत नफरत हो गई थी।जब भी शादी की बात होती उसे गुस्सा आता।अब उसे समझने लगा था उसके साथ बहोत गलत हुआ है।उसने कई बार कहा वो ये शादी नही करना चाहती, लेकीन कोई भी उसकी बात नही सुन रहा था।हर बार उसे चुप कराया जाता।कई बार वो गेहरी सोच मे पड जाती, आखीर उसके साथ ही ये सब क्यु हो रहा है।उसकी सहेलिया तो आगे की पढाई की बाते करती थी, की १० वी के बाद कौन कीस शाखा मे जायेगा।उन्हे जिंदगी मे क्या बनना है, उनके माता-पिता भी उनकी आगे की पढाई मे उनका साथ दे रहे थे।लेकीन उस लडकी के घर मे बस शादी की ही बात होती थी।१० वी कक्षा पास होने बाद अब वो आगे की पढाई करना चाहती थी,लेकीन ये बहोत मुश्किल था।काॅलेज तो उसे कोई भेजने से रहा,उसकी कीस्मत अच्छी थी की शादी मे देरी हो रही थी और उसे पढने का मौका मिल रहा था।बहोत मिन्नते करने पर उसेने काॅलेज मे दाखिला लिया।जब वो ११वी मे थी तब उसका शारिरीक स्वास्थ बिघडने लगा उसकी वजह थी मानसिक तणाव,वो हमेशा गेहरी सोच मे डुबी रेहती। जिसके कारण उसके हरमोन्स असमतोल हो गये थे।और उसे कई सारी स्वास्थ समस्याएँ हो गई थी।
                        आखिर शादी का दीन आ ही गया।उसने कई बार कहा वो ये शादी नही करना चाहती पर उसकी कौन सुनता। घरवाले उसे डरा धमका रहे थे।शादी का दीन मानो उसे अपने मौत का दीन लग रहा था। एक अजिब सी घुटन हो रही थी।शादी हो गई उसे पता भी नही चला वो मानो जिंदा होकर भी मर रही थी।उस वक्त उसके मन का हाल शायद ही कोई समझ पाता।
                        और फीर उसका डर उस पर हावी हो गया, और उसका जुनुन बन गया। उसने शादी की रात ही अपने ससुरालवालो से केह दीया वो शादी नही करना चाहती थी, उसे वहा नही रेहना है।उस वक्त मानो उसे किसिका भी डर नही रहा था।डर की जगह बगावत ने ले ली थी।और फीर उसके घरवालो को बुलाया गया।वो उसे हर तराह से समझाने लगे की अब शादी हो गई है। लेकीन लडकी को हर हाल मे शादी तोडनी थी। शादी तो जबरदस्ती करवा दी लेकीन कोई उसे जबरदस्ती निभवा नही सकता। घरवालो ने कई कोशिश की वो शादी ना तोडे। लेकीन लडकी ने ठान लिया था की चाहे जान चले जाए पर अब वो ए सब नही सेह सकती थी। उसे इस सब से आजाद होना था।
                        आखिर उसका तलाक हो ही गया।
                         वो आजाद हो गई लेकीन १७ साल की उम्र मे उसे कीतनी मुश्किलो का, लागो की तानो का सामना करना पडा। उसकी मर्जी के कोई मायने नही थे, जब की जिंदगी तो उसी की थी। उसे सिर्फ दबाया गया।उसके सपने,उसकी सोच सब को कुचल दीया,अब तलाकशुदा का ढब्बा उसके माथे मार दीया।
                      लेकीन फीर भी दुनिया का डर,घरवालो का डर इस सब की फीक्र छोड उसने बडे हिम्मत से अपना तलाक करवाया।
                     यही उसकी कहानी थी।एक उडान हिम्मत की....

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